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ramayan 2.66.20: 'जो हमारे तथा आपके रक्षक और स्वामी थे, वे बुद्धिमान श्री रामचन्द्र राजलक्ष्मी को छोड़कर वन को चले गए।   |   ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.66.20 
स हि नाथ: स चास्माकं तव च प्रभुरात्मवान्।
वनं रामो गत: श्रीमान् विहाय नृपतिश्रियम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'जो हमारे तथा आपके रक्षक और स्वामी थे, वे बुद्धिमान श्री रामचन्द्र राजलक्ष्मी को छोड़कर वन को चले गए।
 
'The one who was our as well as your protector and Lord, that wise Shri Ramchandra left for the forest, leaving behind Rajlakshmi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)