vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक
»
श्लोक 20
श्लोक
2.66.20
स हि नाथ: स चास्माकं तव च प्रभुरात्मवान्।
वनं रामो गत: श्रीमान् विहाय नृपतिश्रियम्॥ २०॥
अनुवाद
'जो हमारे तथा आपके रक्षक और स्वामी थे, वे बुद्धिमान श्री रामचन्द्र राजलक्ष्मी को छोड़कर वन को चले गए।
'The one who was our as well as your protector and Lord, that wise Shri Ramchandra left for the forest, leaving behind Rajlakshmi.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas