श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.66.19 
कैकेय्या दुष्टभावाया राघवेण विवर्जिता:।
कथं सपत्न्या वत्स्याम: समीपे विधवा वयम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘श्री रामजी से वियोग होने पर हम विधवाएँ इस दुष्टबुद्धि सहधर्मिणी कैकेयी के पास कैसे रहेंगी?॥19॥
 
‘After being separated from Shri Rama how will we widows stay near this evil-minded co-wife Kaikeyi?॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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