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हा महाराज रामेण सततं प्रियवादिना।
विहीना: सत्यसंधेन किमर्थं विजहासि न:॥ १८॥
अनुवाद
वह बोली, 'हे महाराज! हम तो अपने सत्यवादी और मधुरभाषी पुत्र श्री रामजी से पहले ही विमुख हो चुकी थीं। अब आप भी हमें क्यों त्याग रहे हैं?॥ 18॥
She said, 'Oh Maharaj! We were already separated from our son Shri Ram, who is truthful and always speaks sweetly. Now why are you also abandoning us?॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥