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ramayan 2.66.15: वह सर्वज्ञ मंत्री राजा का दाह संस्कार उसके पुत्र के बिना नहीं कर सकता था, इसलिए वह उसके शव की रक्षा करने लगा।   |   ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.66.15 
न तु संकालनं राज्ञो विना पुत्रेण मन्त्रिण:।
सर्वज्ञा: कर्तुमीषुस्ते ततो रक्षन्ति भूमिपम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह सर्वज्ञ मंत्री राजा का दाह संस्कार उसके पुत्र के बिना नहीं कर सकता था, इसलिए वह उसके शव की रक्षा करने लगा।
 
That omniscient minister could not perform the cremation of the king without his son, so he started protecting his corpse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)