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श्लोक 2.66.12  |
साहमद्यैव दिष्टान्तं गमिष्यामि पतिव्रता।
इदं शरीरमालिङ्गॺ प्रवेक्ष्यामि हुताशनम्॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| 'मैं भी आज मृत्यु का आलिंगन करूँगी। पतिव्रता स्त्री की भाँति अपने पति के शरीर का आलिंगन करूँगी और चिता की अग्नि में प्रविष्ट हो जाऊँगी।'॥12॥ |
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| 'I too shall embrace death today. Like a faithful wife, I shall embrace my husband's body and enter the fire of the funeral pyre.'॥ 12॥ |
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