श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.66.11 
वृद्धश्चैवाल्पपुत्रश्च वैदेहीमनुचिन्तयन्।
सोऽपि शोकसमाविष्टो नूनं त्यक्ष्यति जीवितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'जो राजा जनक वृद्ध हो गए हैं और जिनकी संतान केवल पुत्रियाँ ही हैं, वे सीता की बार-बार चिन्ता करते हुए शोक में डूबकर अवश्य ही प्राण त्याग देंगे।॥ 11॥
 
'King Janaka, who has grown old and has only daughters as his progeny, will surely give up his life in grief, worrying about Sita again and again.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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