श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  2.64.75 
हा राघव महाबाहो हा ममायासनाशन।
हा पितृप्रिय मे नाथ हा ममासि गत: सुत॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु रघुनन्दन! हे मेरे संकटों को दूर करने वाले श्री राम! हे पिता के प्रिय पुत्र! हे मेरे प्रभु! हे मेरे पुत्र! तुम कहाँ चले गए?॥ 75॥
 
'Oh mighty-armed Raghunandan! Oh Shri Ram who removes my troubles! Oh father's beloved son! Oh my lord! Oh my son! Where have you gone?॥ 75॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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