श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.64.53 
त्वयापि च यदज्ञानान्निहतो मे स बालक:।
तेन त्वामपि शप्स्येऽहं सुदु:खमतिदारुणम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
"क्योंकि तूने अनजाने में मेरे पुत्र को मार डाला, इसलिए मैं तुझे भयंकर और पीड़ादायक शाप दूँगा।" 53.
 
"Because you killed my son unknowingly, I will curse you with a terrible and painful curse." 53.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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