श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.64.49 
स्थानमस्मि महत् प्राप्तो भवतो: परिचारणात्।
भवन्तावपि च क्षिप्रं मम मूलमुपैष्यथ:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तुम दोनों की सेवा करके मैंने महान पद प्राप्त किया है; अब तुम भी शीघ्र ही मेरे पास आओ ॥49॥
 
"I have attained a great position by serving you both; now you too please come to me soon." ॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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