श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.64.39 
दातुमर्हति धर्मात्मा लोकपालो महायशा:।
ईदृशस्य ममाक्षय्यामेकामभयदक्षिणाम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
"वह एक नेक आदमी हैं, बहुत प्रसिद्ध लोकपाल हैं। वह मुझ जैसे अनाथ को एक बार सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।"
 
"He is a virtuous man, a very famous Lokpal. He can grant protection to an orphan like me once."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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