श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.64.31 
नन्वहं तेऽप्रिय: पुत्र मातरं पश्य धार्मिकीम्।
किं च नालिङ्गसे पुत्र सुकुमार वचो वद॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
"बेटा! यदि मैं तुम्हें प्रिय नहीं हूँ तो अपनी धर्मपरायण माता को देखो। तुम उसे गले क्यों नहीं लगाते? बेटा! कुछ तो बोलो।"
 
"Son! If I am not dear to you then look at your pious mother. Why don't you embrace her? Son! Say something.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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