श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.64.26 
नय नौ नृप तं देशमिति मां चाभ्यभाषत।
अद्य तं द्रष्टुमिच्छाव: पुत्रं पश्चिमदर्शनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने मुझसे यह भी कहा, ‘हे प्रभु! हम दोनों को उस स्थान पर ले चलो जहाँ हमारा पुत्र मरा पड़ा है। हम उसे अभी देखना चाहते हैं। यहीं उसका अंतिम दर्शन होगा।’॥26॥
 
‘They also said to me, ‘Lord! Take us both to the place where our son is lying dead. We want to see him now. This will be our last sight of him.’॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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