श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.64.22 
यद्येतदशुभं कर्म न स्म मे कथये: स्वयम्।
फलेन्मूर्धा स्म ते राजन् सद्य: शतसहस्रधा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
"राजा! यदि आप यहाँ आकर मुझे अपने पाप कर्म के बारे में न बताते तो आपका सिर शीघ्र ही हजार टुकड़ों में टूट जाता।"
 
"King! If you had not come here and told me about your sinful act, your head would have soon broken into thousands of pieces."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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