श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.64.20 
स तच्छ्रुत्वा वच: क्रूरं मया तदघशंसिना।
नाशकत् तीव्रमायासं स कर्तुं भगवानृषि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘मैंने अपने मुख से अपना पाप प्रकट कर दिया था, इसलिए मेरे क्रूर वचन सुनकर भी पूज्य महर्षि मुझे भस्म हो जाने का शाप देने का कठोर दण्ड नहीं दे सके॥ 20॥
 
‘I had revealed my sin with my mouth, so even after hearing my cruel words, the revered Maharshi could not give me the severe punishment of cursing me to be reduced to ashes.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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