श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.64.19 
अज्ञानाद् भवत: पुत्र: सहसाभिहतो मया।
शेषमेवं गते यत् स्यात् तत् प्रसीदतु मे मुनि:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
"इस प्रकार अनजाने में ही मेरे हाथों से तुम्हारा पुत्र मारा गया है। ऐसी स्थिति में आप महर्षि मुझ पर प्रसन्न हों, जिससे मेरे लिए जो भी शाप या अनुग्रह शेष रह गया हो, वह आप मुझे दे सकें।"॥19॥
 
"In this way your son has been killed by my hands unknowingly. In such a situation you Maharshi should be pleased with me so that you can give me whatever curse or grace is left for me.''॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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