श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.64.15 
तत: श्रुतो मया शब्दो जले कुम्भस्य पूर्यत:।
द्विपोऽयमिति मत्वाहं बाणेनाभिहतो मया॥ १५॥
 
 
अनुवाद
"थोड़ी देर बाद मुझे पानी में घड़ा भरने की आवाज़ सुनाई दी। मुझे लगा कि कोई हाथी पानी पीने आया है, इसलिए मैंने उस पर तीर चला दिया।"
 
"After a while I heard the sound of a pot being filled in the water. I thought an elephant had come to drink water, so I shot an arrow at it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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