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श्लोक  2.63.42-43h 
जानन्नपि च किं कुर्यादशक्तश्चापरिक्रम:॥ ४२॥
भिद्यमानमिवाशक्तस्त्रातुमन्यो नगो नगम्।
 
 
अनुवाद
"जानकर भी हम क्या कर सकते हैं? क्योंकि हम लाचार हैं और हिल भी नहीं सकते। जैसे हवा आदि से टूटा हुआ पेड़ कोई दूसरा पेड़ नहीं बचा सकता, वैसे ही मेरे पिता भी मेरी रक्षा नहीं कर सकते।"
 
“Even if we know, what can we do? Because we are helpless and cannot even move. Just like a tree which is being broken by wind etc., no other tree can save it, in the same way even my father cannot protect me. 42 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)