श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 63: राजा दशरथ का शोक और उनका कौसल्या से अपने द्वारा मुनि कुमार के मारे जाने का प्रसङ्ग सुनाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.63.13 
यथान्य: पुरुष: कश्चित् पलाशैर्मोहितो भवेत्।
एवं मयाप्यविज्ञातं शब्दवेध्यमिदं फलम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे कोई अन्य अज्ञानी मनुष्य पलाश के फूलों के प्रति मोहित हो जाता है और उसके कड़वे फलों को नहीं जानता, वैसे ही मैं भी ‘शब्द वेधी बाण विद्या’ की प्रशंसा सुनकर उसके प्रति मोहित हो गया। मैं नहीं जानता था कि उससे ऐसा क्रूर पाप कर्म हो सकता है और ऐसा भयंकर फल प्राप्त हो सकता है॥13॥
 
‘Just as some other uneducated person is attracted to the flowers of Palaash tree and does not know about its bitter fruits, similarly I also became attracted to the ‘Shabd Vedhi Baan Vidya’ after hearing its praises. I did not know that such a cruel sinful act can be committed by it and such a terrible result can be achieved.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)