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श्लोक 2.62.16  |
शक्यमापतित: सोढुं प्रहारो रिपुहस्तत:।
सोढुमापतित: शोक: सुसूक्ष्मोऽपि न शक्यते॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| शत्रु के हाथ से अपने ऊपर पड़ने वाले शस्त्रों का प्रहार तो सहन किया जा सकता है; परन्तु भगवान् द्वारा प्राप्त होने वाला थोड़ा-सा भी दुःख सहन नहीं किया जा सकता॥16॥ |
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| ‘The attack of weapons falling upon oneself by the hands of the enemy can be endured; but even a little grief received by God cannot be endured.॥ 16॥ |
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