श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 62: दुःखी हुए राजा दशरथ का कौसल्या को हाथ जोड़कर मनाना और कौसल्या का उनके चरणों में पड़कर क्षमा माँगना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.62.16 
शक्यमापतित: सोढुं प्रहारो रिपुहस्तत:।
सोढुमापतित: शोक: सुसूक्ष्मोऽपि न शक्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
शत्रु के हाथ से अपने ऊपर पड़ने वाले शस्त्रों का प्रहार तो सहन किया जा सकता है; परन्तु भगवान् द्वारा प्राप्त होने वाला थोड़ा-सा भी दुःख सहन नहीं किया जा सकता॥16॥
 
‘The attack of weapons falling upon oneself by the hands of the enemy can be endured; but even a little grief received by God cannot be endured.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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