श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 62: दुःखी हुए राजा दशरथ का कौसल्या को हाथ जोड़कर मनाना और कौसल्या का उनके चरणों में पड़कर क्षमा माँगना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.62.10 
तद् वाक्यं करुणं राज्ञ: श्रुत्वा दीनस्य भाषितम्।
कौसल्या व्यसृजद् बाष्पं प्रणालीव नवोदकम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
दुःखी राजा दशरथ के वे करुण शब्द सुनकर कौशल्या ऐसे आँसू बहाने लगीं, मानो छत की नाली से वर्षा का ताजा जल गिर रहा हो।
 
On hearing those pitiful words from the grieved King Dasaratha, Kausalya began to shed tears as if fresh rainwater were falling from the gutter of the roof.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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