श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 62: दुःखी हुए राजा दशरथ का कौसल्या को हाथ जोड़कर मनाना और कौसल्या का उनके चरणों में पड़कर क्षमा माँगना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.62.1 
एवं तु क्रुद्धया राजा राममात्रा सशोकया।
श्रावित: परुषं वाक्यं चिन्तयामास दु:खित:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब माता कौशल्या ने दुःख और क्रोध में भरकर राजा दशरथ से ऐसे कठोर वचन कहे, तब वे दुःखी हुए और बड़ी चिंता में पड़ गए ॥1॥
 
When mother Kausalya, filled with grief and anger, spoke such harsh words to King Dasharath, he was saddened and fell into great worry. ॥1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas