श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.61.9 
वज्रसारमयं नूनं हृदयं मे न संशय:।
अपश्यन्त्या न तं यद् वै फलतीदं सहस्रधा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'मेरा हृदय निश्चय ही लोहे का बना है, इसमें कुछ भी संदेह नहीं है; क्योंकि यदि मैं श्री राम को न भी देखूँ, तो भी मेरा हृदय हजार टुकड़ों में नहीं टूटता॥9॥
 
'My heart is certainly made of iron, there is no doubt about it; because even if I do not see Shri Ram, my heart does not break into thousands of pieces.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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