श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.61.6 
गीतवादित्रनिर्घोषं श्रुत्वा शुभसमन्विता।
कथं क्रव्यादसिंहानां शब्दं श्रोष्यत्यशोभनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो शुभ वस्तुओं से युक्त है और सदैव गीतों और वाद्यों की मधुर ध्वनि सुनती है, वह जंगल में मांसभक्षी सिंहों की अशुभ ध्वनि कैसे सुन सकती है?॥6॥
 
'How can she, who is blessed with auspicious things and always listens to the sweet sounds of songs and musical instruments, hear the ominous sounds of carnivorous lions in the jungle?॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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