श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.61.5 
भुक्त्वाशनं विशालाक्षी सूपदंशान्वितं शुभम्।
वन्यं नैवारमाहारं कथं सीतोपभोक्ष्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'विशालोचना सीता पहले सुन्दर व्यंजनों से युक्त स्वादिष्ट भोजन खाती थीं, अब वे वन से लाए चावल के डिब्बों से बने सूखे चावल कैसे खाएंगी?
 
'Vishaalochana Sita used to eat delicious food with beautiful dishes, now how will she eat dry rice made from tin of rice from the forest?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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