| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 2.61.4  | सा नूनं तरुणी श्यामा सुकुमारी सुखोचिता।
कथमुष्णं च शीतं च मैथिली विसहिष्यते॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | वह सोलह-अठारह वर्ष की सुकुमारी युवती सीता, मिथिला की पुत्री, जो केवल सुख भोगने के योग्य है, वन में शीत और उष्णता का कष्ट कैसे सहन करेगी?॥4॥ | | | | ‘How will that sixteen-eighteen year old delicate young girl, Sita, daughter of Mithila, who is fit only to enjoy happiness, endure the pain of cold and heat in the forest?॥ 4॥ | | ✨ ai-generated | | |
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