श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.61.24 
गतिरेका पतिर्नार्या द्वितीया गतिरात्मज:।
तृतीया ज्ञातयो राजंश्चतुर्थी नैव विद्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! स्त्री का एक आधार उसका पति है, दूसरा उसका पुत्र है, तीसरा उसका पिता, भाई तथा अन्य सम्बन्धी हैं, उसके लिए कोई चौथा आधार नहीं है॥ 24॥
 
'O King! For a woman one support is her husband, second is her son and third is her father, brother and other relatives, there is no fourth support for her.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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