श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.61.23 
द्विजातिचरितो धर्म: शास्त्रे दृष्ट: सनातनै:।
यदि ते धर्मनिरते त्वया पुत्रे विवासिते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'आपके धर्मात्मा पुत्र को देश से निकाल दिया गया है, अतः प्रश्न यह उठता है कि जिस धर्म का अनुभव सनातन ऋषियों ने वेदों में किया है और जिसका श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने अपने आचरण में पालन किया है, वह आपके विचार में सत्य है या नहीं॥ 23॥
 
'Your righteous son has been banished from the country, so the question arises whether the Dharma which the Sanatan Rishis have experienced in the Vedas and which the best Brahmins have followed in their conduct, is true in your view or not.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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