| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 2.61.22  | स तादृश: सिंहबलो वृषभाक्षो नरर्षभ:।
स्वयमेव हत: पित्रा जलजेनात्मजो यथा॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | ऐसा वीर पुत्र, जो सिंह के समान बलवान और बैल के समान बड़ी-बड़ी आँखों वाला था, अपने ही पिता द्वारा मारा गया (राज्य से वंचित कर दिया गया) । जैसे मछली के बच्चे को उसका पिता खा जाता है ॥ 22॥ | | | | ‘Such a brave son, who was as strong as a lion and had eyes as big as a bull, was killed (deprived of the kingdom) by his own father. Just like a child of a fish is eaten by its father.॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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