श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.61.21 
नन्वसौ काञ्चनैर्बाणैर्महावीर्यो महाभुज:।
युगान्त इव भूतानि सागरानपि निर्दहेत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाबली, पराक्रमी और महाबली श्री रामजी अपने स्वर्ण-मंडित बाणों द्वारा सम्पूर्ण समुद्रों को जलाकर राख कर देते हैं, जैसे महाबली अग्निदेव प्रलयकाल में सम्पूर्ण प्राणियों को भस्म कर देते हैं॥ 21॥
 
'The mighty, powerful and powerful Shri Ram can burn down all the oceans with his gold-adorned arrows, just as the powerful Agni Deva (Lord Agni) reduces all creatures to ashes during the time of deluge.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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