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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना
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श्लोक 19
श्लोक
2.61.19
नैवंविधमसत्कारं राघवो मर्षयिष्यति।
बलवानिव शार्दूलो वालधेरभिमर्शनम्॥ १९॥
अनुवाद
जैसे महाबली सिंह अपनी पूँछ पकड़े हुए किसी को सहन नहीं कर सकता, वैसे ही भगवान् राम भी ऐसा अपमान सहन नहीं कर सकेंगे॥19॥
‘Just as a mighty lion cannot tolerate someone holding its tail, similarly, Lord Rama will not be able to tolerate such insult.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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