श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 61: कौसल्या का विलाप पूर्वक राजा दशरथ को उपालम्भ देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.61.16 
न परेणाहृतं भक्ष्यं व्याघ्र: खादितुमिच्छति।
एवमेव नरव्याघ्र: परलीढं न मंस्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जैसे व्याघ्र गीदड़ आदि अन्य पशुओं द्वारा लाए गए या खाए गए शिकार को खाना पसंद नहीं करता, वैसे ही सिंहपुरुष श्री रामजी दूसरों द्वारा भोगे गए राज्य के सुख को स्वीकार नहीं करेंगे॥ 16॥
 
Just as a tiger does not like to eat the prey brought or eaten by other animals like jackals etc., similarly the lion-man Shri Ram will not accept the pleasures of the kingdom that have been enjoyed by others.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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