श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 6: सीता सहित श्रीराम का नियम परायण होना, हर्ष में भरे पुरवासियों द्वारा नगर की सजावट  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.6.18 
प्रकाशकरणार्थं च निशागमनशङ्कया।
दीपवृक्षांस्तथा चक्रुरनुरथ्यासु सर्वश:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यह अनुमान करके कि राज्याभिषेक के समय रात्रि हो जायेगी, ग्रामवासियों ने प्रकाश की व्यवस्था करने के लिए सड़कों के दोनों ओर वृक्षों की भाँति अनेक शाखाओं वाले दीपस्तंभ खड़े कर दिये। 18॥
 
Anticipating that it would be night by the time of the coronation, the villagers erected lamp posts with many branches like trees on both sides of the roads to make arrangements for lighting. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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