श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 6: सीता सहित श्रीराम का नियम परायण होना, हर्ष में भरे पुरवासियों द्वारा नगर की सजावट  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.6.14 
नटनर्तकसङ्घानां गायकानां च गायताम्।
मन:कर्णसुखा वाच: शुश्राव जनता तत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय वहाँ के लोग अभिनेताओं और नर्तकों के समूहों तथा गायकों के गायन को सुन रहे थे, जो मन और कानों को आनन्द देने वाले थे॥14॥
 
At that time the people there were listening to the groups of actors and dancers and the singing of singers which gave pleasure to the mind and ears.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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