| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 6: सीता सहित श्रीराम का नियम परायण होना, हर्ष में भरे पुरवासियों द्वारा नगर की सजावट » श्लोक 11-13 |
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| | | | श्लोक 2.6.11-13  | सिताभ्रशिखराभेषु देवतायतनेषु च।
चतुष्पथेषु रथ्यासु चैत्येष्वट्टालकेषु च॥ ११॥
नानापण्यसमृद्धेषु वणिजामापणेषु च।
कुटुम्बिनां समृद्धेषु श्रीमत्सु भवनेषु च॥ १२॥
सभासु चैव सर्वासु वृक्षेष्वालक्षितेषु च।
ध्वजा: समुच्छ्रिता: साधु पताकाश्चाभवंस्तथा॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | जिन मंदिरों की चोटियों पर श्वेत मेघ विराजमान थे, उन पर्वतों के समान ऊँचे मंदिरों पर, चौराहों पर, गलियों में, पवित्र वृक्षों पर, समस्त सभाओं में, ऊँचे-ऊँचे महलों में, नाना प्रकार की विक्रय-सामग्री से भरी हुई व्यापारियों की बड़ी-बड़ी दुकानों पर, परिवारों के सुन्दर समृद्ध भवनों पर तथा दूर से दिखाई देने वाले वृक्षों पर भी ऊँचे-ऊँचे ध्वज और पताकाएँ फहराई गईं॥11-13॥ | | | | High flags were hoisted and banners were hoisted on the temples which were as tall as mountains on whose peaks white clouds rest, on the crossroads, streets, sacred trees, all the assemblies, towering palaces, large shops of merchants filled with various kinds of saleable goods, beautiful prosperous buildings of the families and even on the trees visible from afar.॥ 11-13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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