श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.59.9 
अत्रोद्यानानि शून्यानि प्रलीनविहगानि च।
न चाभिरामानारामान् पश्यामि मनुजर्षभ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! अयोध्या के उद्यान उजड़ गए हैं। उनमें रहने वाले पक्षी भी लुप्त हो गए हैं। यहाँ के उद्यान मुझे पहले जैसे सुन्दर नहीं लगते॥9॥
 
‘O best of men! The gardens of Ayodhya have become desolate. The birds that used to live in them have also disappeared. The gardens here do not look as beautiful to me as they used to.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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