श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.59.6 
न च सर्पन्ति सत्त्वानि व्याला न प्रचरन्ति च।
रामशोकाभिभूतं तन्निष्कूजमभवद् वनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वन के पशु भोजन के लिए कहीं नहीं जाते। यहाँ तक कि अजगर आदि सर्प भी जहाँ के तहाँ पड़े रहते हैं, आगे नहीं बढ़ते। श्रीराम के शोक से सारा वन मौन हो गया है।
 
‘The animals of the forest do not go anywhere for food. Even snakes like pythons are lying where they are and do not move forward. The entire forest has become silent due to the grief of Shri Ram.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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