श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.59.4 
विषये ते महाराज महाव्यसनकर्शिता:।
अपि वृक्षा: परिम्लाना: सपुष्पाङ्कुरकोरका:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! इस महान संकट के कारण आपके राज्य के वृक्ष भी क्षीण हो गए हैं; उनके फूल, अंकुर और कलियाँ सब सूख गए हैं।
 
‘Maharaj! Due to this great crisis the trees in your kingdom have also become emaciated; their flowers, sprouts and buds have all withered away.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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