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श्लोक 2.59.4  |
विषये ते महाराज महाव्यसनकर्शिता:।
अपि वृक्षा: परिम्लाना: सपुष्पाङ्कुरकोरका:॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| ‘महाराज! इस महान संकट के कारण आपके राज्य के वृक्ष भी क्षीण हो गए हैं; उनके फूल, अंकुर और कलियाँ सब सूख गए हैं। |
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| ‘Maharaj! Due to this great crisis the trees in your kingdom have also become emaciated; their flowers, sprouts and buds have all withered away. |
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