श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.59.34 
इति विलपति पार्थिवे प्रणष्टे
करुणतरं द्विगुणं च रामहेतो:।
वचनमनुनिशम्य तस्य देवी
भयमगमत् पुनरेव राममाता॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जब राजा दशरथ श्री राम के लिए इस प्रकार विलाप करते हुए मूर्छित हो गए, तब उनके अत्यंत करुण वचन सुनकर राम की माता देवी कौशल्या को बहुत भय हुआ॥34॥
 
When King Dasharath fell unconscious while lamenting for Sri Rama in this manner, hearing his extremely pitiful words, Rama's mother Devi Kausalya became doubly afraid. ॥ 34॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे एकोनषष्टितम: सर्ग:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें उनसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५९॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd