श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.59.3 
गुहेन सार्धं तत्रैव स्थितोऽस्मि दिवसान् बहून्।
आशया यदि मां राम: पुन: शब्दापयेदिति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मैं वहां कई दिनों तक गुहा के साथ रहा, इस आशा में कि शायद भगवान राम मुझे वापस बुला लेंगे।
 
I stayed there with Guha for several days in the hope that perhaps Lord Rama would call me back. 3.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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