श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.59.25 
लोहिताक्षं महाबाहुमामुक्तमणिकुण्डलम्।
रामं यदि न पश्येयं गमिष्यामि यमक्षयम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं लाल नेत्रों वाले, विशाल भुजाओं वाले और कुण्डलों में मणि धारण करने वाले श्री रामजी को न देखूँ, तो अवश्य ही यमलोक को जाऊँगा॥ 25॥
 
If I do not see Shri Ram who has red eyes, large arms and who wears precious stones in his earrings, then I shall surely go to Yamaloka. ॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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