श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.59.24 
वृत्तदंष्ट्रो महेष्वास: क्वासौ लक्ष्मणपूर्वज:।
यदि जीवामि साध्वेनं पश्येयं सीतया सह॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महान धनुर्धर, कुण्डकली के समान श्वेत दाँतों वाले, लक्ष्मण के बड़े भाई श्री राम कहाँ हैं? यदि मैं उन्हें सीता सहित भलीभाँति देख सकूँ, तो ही जीवित रह सकूँगा॥ 24॥
 
Where is Shri Ram, the great archer, the one with teeth as white as Kundakali, the elder brother of Lakshman? If I can see him properly with Sita, then only I can survive.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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