श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 59: सुमन्त्र द्वारा श्रीराम के शोक से जडचेतन एवं अयोध्यापुरी की दुरवस्था का वर्णन तथा राजा दशरथ का विलाप  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.59.22 
यद्यद्यापि ममैवाज्ञा निवर्तयतु राघवम्।
न शक्ष्यामि विना रामं मुहूर्तमपि जीवितुम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यदि आज भी इस राज्य में मेरी आज्ञा चलती है, तो तुम मेरी आज्ञा से श्री राम को वन से वापस ले आओ, क्योंकि अब मैं उनके बिना दो क्षण भी नहीं रह सकूँगा॥ 22॥
 
If even today my command prevails in this kingdom, then you should go and bring back Shri Ram from the forest on my orders, because now I will not be able to live without him even for two moments.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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