श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 58: महाराज दशरथ की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम और लक्ष्मण के संदेश सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.58.8 
व्यालैर्मृगैराचरितं कृष्णसर्पनिषेवितम्।
कथं कुमारौ वैदेह्या सार्धं वनमुपाश्रितौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'जिस वन में अजगर, व्याघ्र और सिंह आदि भयंकर पशु विचरण करते हैं और जहाँ काले सर्प खाते हैं, उसी वन में आश्रय लेने वाले मेरे दोनों पुत्र सीता के साथ कैसे रहेंगे?॥8॥
 
'How will my two sons, who have taken shelter in the same forest where ferocious animals like pythons, tigers and lions roam and where black serpents eat, stay there with Sita?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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