श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 58: महाराज दशरथ की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम और लक्ष्मण के संदेश सुनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.58.5 
क्व नु वत्स्यति धर्मात्मा वृक्षमूलमुपाश्रित:।
सोऽत्यन्तसुखित: सूत किमशिष्यति राघव:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'सूत! पुण्यात्मा श्री राम वृक्ष की जड़ का सहारा लेकर कहाँ निवास करेंगे? बड़े सुख से पले हुए मेरे प्रिय राम वहाँ क्या खाएँगे?॥5॥
 
' Suta! Where will the virtuous Shri Ram reside, taking support of the tree's root? What will my dear Ram, who was brought up in great comfort, eat there?॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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