श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.57.9 
सुमन्त्रमभिधावन्त: शतशोऽथ सहस्रश:।
क्व राम इति पृच्छन्त: सूतमभ्यद्रवन् नरा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सुमन्तराम को देखकर नगर के सैकड़ों-हजारों लोग दौड़कर आये और उनके रथ के साथ-साथ दौड़ने लगे और पूछने लगे, 'श्री राम कहाँ हैं?'
 
Seeing Sumantram, hundreds and thousands of people from the city came running and started running alongside his chariot, asking 'Where is Shri Rama?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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