श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.57.7 
कच्चिन्न सगजा साश्वा सजना सजनाधिपा।
रामसंतापदु:खेन दग्धा शोकाग्निना पुरी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'क्या ऐसा हुआ है कि हाथी, घोड़े, मनुष्य और राजा सहित सारी अयोध्या नगरी श्री रामजी के वियोग के दुःख से शोक से जल उठी है?'॥ 7॥
 
'Has it happened that the entire Ayodhya city, including elephants, horses, men and the King, became aflame with grief due to the anguish of separation from Sri Rama?'॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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