श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.57.28 
सुमित्रया तु सहिता कौसल्या पतितं पतिम्।
उत्थापयामास तदा वचनं चेदमब्रवीत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस समय कौशल्या ने सुमित्रा की सहायता से अपने पति को उठाया और इस प्रकार कहा:-॥28॥
 
At that time Kausalya, with the help of Sumitra, raised her fallen husband and said thus:-॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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