श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.57.26 
स तूष्णीमेव तच्छ्रुत्वा राजा विद्रुतमानस:।
मूर्च्छितो न्यपतद् भूमौ रामशोकाभिपीडित:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजा ने चुपचाप यह बात सुनी। सुनकर उसका हृदय द्रवित हो गया। तब वह श्री राम के शोक से अत्यंत व्याकुल हो गया और मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ा॥ 26॥
 
The king listened to it silently. His heart melted (bewildered) on hearing it. Then he became extremely distressed with grief for Shri Ram and fell unconscious on the ground.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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