श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.57.21 
सह रामेण निर्यातो विना राममिहागत:।
सूत: किं नाम कौसल्यां क्रोशन्तीं प्रतिवक्ष्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'यह सारथि सुमन्तराम श्री रामजी के साथ यहाँ से गए थे और उनके बिना ही लौट आए हैं। ऐसी स्थिति में वे दुःख से रोती हुई कौशल्या को क्या उत्तर देंगे?॥ 21॥
 
'This charioteer Sumantram had gone from here with Shri Ram and has returned without him. In such a situation, what answer will he give to Kausalya who is crying in sorrow?॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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