श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 57: सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना, उनके मुख से श्रीराम का संदेश सुनकर पुरवासियों का विलाप, राजा दशरथ और कौसल्या की मूर्छा तथा अन्तःपुर की रानियों का आर्तनाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.57.20 
ततो दशरथस्त्रीणां प्रासादेभ्यस्ततस्तत:।
रामशोकाभितप्तानां मन्दं शुश्राव जल्पितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजभवनों में सर्वत्र श्री रामजी के शोक से दुःखी राजा दशरथ की रानियों के कहे हुए वचन सुनाई देने लगे॥20॥
 
Thereafter, from everywhere in the royal palaces, the words spoken by the queens of King Dasharatha, who were saddened by the grief of Shri Ram, were heard. 20॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas